एपीजेनेटिक्स में प्रकाशित इस शोध से अभी तक ये बात साफ नहीं हो पाई है कि स्पर्म की क्वॉलिटी और संख्या में होने वाले बदलाव फर्टिलाइजेशन (निषेचन) प्रक्रिया और स्वास्थ्य पर असर डालते हैं या नहीं. फिर भी शोधकर्ताओं ने तंबाकू सेवन को खराब बताया है.
डिविज़न ऑफ रिप्रोडक्टिव साइंस के डिपार्टमेंट ऑफ ऑब्सटैट्रिक्स एंड गाएनेकोलॉजी, ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, नॉर्थ कैरोलीना की मुख्य लेखिका सुज़न मर्फी का कहना है कि, अगर कोई महिला गर्भवती होने का विचार कर रही हैं तो उन्हें तकरीबन छह महीने पहले कैनाबिस (गांजा) का सेवन करना बंद करना होगा.
हालांकि, गांजा से उत्पन्न होने वाली स्पर्म क्वॉलिटी और संख्या स्थायी नहीं होती है. पुरुष, रोज़ नए स्पर्म बनाते हैं. पूरी तरह से तैयार होने में स्पर्म को करीब 70 दिन लगते हैं. इसके बाद वे खत्म होते हैं जिन्हें हमारा शरीर सोख लेता है.
डिविज़न ऑफ रिप्रोडक्टिव साइंस के डिपार्टमेंट ऑफ ऑब्सटैट्रिक्स एंड गाएनेकोलॉजी, ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, नॉर्थ कैरोलीना की मुख्य लेखिका सुज़न मर्फी का कहना है कि, अगर कोई महिला गर्भवती होने का विचार कर रही हैं तो उन्हें तकरीबन छह महीने पहले कैनाबिस (गांजा) का सेवन करना बंद करना होगा.
पहले सामने आए शोध से भी यही पता चला है कि मरुआना (गांजा) का सेवन पुरुष और महिला दोनों में स्पर्म क्वॉलिटी को कम करता है. हाल ही में हुए शोध से पहली बार यूरीन में टीएचसी लेवल और स्पर्म क्वॉलिटी में गिरावट के बीच संबंध दिखाई दिया है. 12 लोग, जो स्मोकिंग नहीं करते हैं उनमें दोगुनी अच्छी स्पर्म एकाग्रता पाई गई. उन 12 लोगों से जो स्मोकिंग करते हैं.
हालांकि, गांजा से उत्पन्न होने वाली स्पर्म क्वॉलिटी और संख्या स्थायी नहीं होती है. पुरुष, रोज़ नए स्पर्म बनाते हैं. पूरी तरह से तैयार होने में स्पर्म को करीब 70 दिन लगते हैं. इसके बाद वे खत्म होते हैं जिन्हें हमारा शरीर सोख लेता है.
https://beautylivingstyle.blogspot.com/2020/05/sperm-quality.html


Comments